कनाडा के विद्यार्थियों की गार्गल जांच होगी
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में विद्यार्थियों में संक्रमण का पता लगाने के लिए जांच का यह तरीका अपनाया जाएगा। बीते गुरुवार को स्थानीय प्रशासन ने आदेश जारी किया कि चार साल से 19 साल तक की आयु के विद्यार्थियों की गार्गल जांच की जाए। यहां के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हेनरी ने कहा कि दुनिया में पहली बार गार्गल टेस्ट को हमारे राज्य में अपनाया जा रहा है, इससे बच्चों में संक्रमण का पता लगाना आसान होगा, उनके लिए स्वाब टेस्टिंग ज्यादा तकलीफदेह होती है।
ऐसे होती हैं जांच
इस जांच के लिए एक खारे सलाइन मिश्रण को मुंह में डालकर पानी के साथ गार्गल करते हैं। मुंह के अंदर ही उस द्रव्य को घुमाते हैं फिर एक छोटी ट्यूब में उस मिश्रण को डाल देते हैं। अब इस नमूने को प्रयोगशाला में भेजकर यह पता लगाया जाता है कि संबंधित व्यक्ति की लार में कोरोना वायरस तो मौजूद नहीं है।
स्वाब जांच जितनी सटीक जांच
कनाडा के स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि हमारे वैज्ञानिकों ने जांच में पाया कि गार्गल जांच और स्वाब जांच के परिणाम में लगभग एकसमान सटीकता है। साथ ही बच्चों और वयस्कों की गार्गल जांच के परिणामों में भी सटीकता पायी गई।
बच्चों की जांच हो तो रुकेगा संक्रमण
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने हाल में कहा कि बच्चों की कोविड जांच को महत्व न देना अब दुनिया के लिए महंगा पड़ रहा। दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है कि स्कूली बच्चों की ठीक ढंग से जांच हो। वहीं, अमेरिका की स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी ने शोध में पाया है कि एसिम्प्टौमेटिक बच्चों से वयस्कों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
अमेरिका में बिना स्वाब के कोरोना जांच
येल विश्वविद्यालय ने सीधे लार से जांच का तरीका इजाद किया जिसे अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आपातकालीन उपयोग की अनुमति दी है। इस तरीके में कोरोना जांच को जनसुलभ बनाया जा सकेगा। साथ ही लोगों को नमूना लेने और जांच रिपोर्ट आने में लगने वाले समय तक इंतजार भी नहीं करना होगा।
सस्ता तरीका -
यह परीक्षण पारंपरिक विधि की तुलना में अप्रत्यक्ष, सरल, कम खर्चीला और कम आक्रामक है। पारंपरिक विवि में नाक और मुंह के अंदर से स्वाब लिया जाता है जो तकलीफदेह होता है।
स्वास्थकर्मियों का खतरा घटेगा -
मुंह और नाक से स्वाब लेने का तरीका महामारीकाल का पर्याय बन चुका है। इस पारंपरिक विधि में हेल्थवर्कर के संक्रमित होने का डर रहता है। नई विधि में स्वास्थ्यकर्मी जांच के लिए मरीज के संपर्क में ही नहीं आएगा।
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